एक बार भगवान गणेश मोदक खाकर अपने मूषक पर सवार होकर विचरण कर रहे थे। अचानक मार्ग में एक सर्प आ गया और मूषक भयभीत होकर दौड़ पड़ा। इससे गणेश जी गिर गए और उनका उदर फट गया। सारे मोदक बाहर बिखर गए।
आकाश में चंद्रमा यह दृश्य देखकर अट्टहास करने लगा। गणेश जी को बहुत क्रोध आया और उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को तुम्हें देखेगा, उस पर मिथ्या दोष लगेगा। तभी से गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित है। यह कथा हमें सिखाती है कि किसी की विपत्ति में हंसना महापाप है।